घर के कुएं का पवित्र जल लेकर 14 जुलाई को रामपुर से शुरू की थी यात्रा, बैद्यनाथ धाम के बाद बासुकीनाथ पहुंचकर भी किया जलाभिषेक
कोरबा/रामपुर। भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था, दृढ़ संकल्प और सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण की मिसाल पेश करते हुए कोरबा जिले के करतला विकासखंड अंतर्गत ग्राम रामपुर निवासी 25 वर्षीय दिलेश्वर पटेल और सक्ती जिले के राजापारा निवासी 25 वर्षीय संगम यादव ने करीब 630 किलोमीटर लंबी धार्मिक पदयात्रा पूरी की।

दोनों शिवभक्त देवघर स्थित प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचे और अपने साथ लेकर गए पवित्र जल से भगवान शिव का श्रद्धापूर्वक जलाभिषेक किया। इसके बाद दोनों ने बैद्यनाथ धाम से बासुकीनाथ धाम तक भी पैदल यात्रा कर वहां भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
14 जुलाई को रामपुर से शुरू हुई थी पदयात्रा
दिलेश्वर पटेल और संगम यादव ने 14 जुलाई को अपनी धार्मिक पदयात्रा का शुभारंभ किया था। दोनों ने कठिन परिस्थितियों, लंबी दूरी, मौसम की चुनौतियों और शारीरिक थकान के बावजूद पैदल यात्रा जारी रखी।
पूरी यात्रा के दौरान दोनों शिवभक्त ‘हर-हर महादेव’ और ‘बोल बम’ के जयघोष के साथ आगे बढ़ते रहे। सावन के पवित्र महीने में बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचकर जलाभिषेक करना उनका प्रमुख संकल्प था।
घर के कुएं का जल लेकर निकले थे दिलेश्वर
इस यात्रा की सबसे खास बात यह रही कि दिलेश्वर पटेल अपने पैतृक घर रामपुर स्थित कुएं का पवित्र जल कलश में लेकर पदयात्रा पर निकले थे।
उनका संकल्प था कि जिस घर और गांव से उन्हें संस्कार, आस्था और जीवन का आधार मिला, उसी स्थान के जल को बाबा भोलेनाथ के चरणों में अर्पित किया जाए।
इसी संकल्प के साथ उन्होंने सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पूरी की और देवघर पहुंचकर बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक किया।
बाबा बैद्यनाथ धाम में पूरा हुआ संकल्प
करीब 630 किलोमीटर की कठिन पदयात्रा पूरी करने के बाद दोनों शिवभक्त देवघर पहुंचे। बाबा बैद्यनाथ धाम में पहुंचकर उन्होंने अपने साथ लाए पवित्र जल से विधि-विधान और श्रद्धा के साथ भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
जलाभिषेक के दौरान दोनों ने देशवासियों के सुख-शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव और विश्व कल्याण की कामना की।
बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के बाद दोनों ने अपनी यात्रा को आगे बढ़ाते हुए बासुकीनाथ धाम जाने का निर्णय लिया।
बैद्यनाथ धाम से बासुकीनाथ तक भी पैदल पहुंचे
बाबा बैद्यनाथ धाम में जलाभिषेक करने के बाद संगम यादव और दिलेश्वर पटेल पैदल ही बासुकीनाथ धाम के लिए रवाना हुए।
दोनों ने रास्तेभर भगवान भोलेनाथ का जयघोष करते हुए यात्रा पूरी की और बासुकीनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
एक ही धार्मिक यात्रा में बैद्यनाथ धाम और बासुकीनाथ धाम पहुंचकर जलाभिषेक करना उनके लिए बेहद खास और यादगार आध्यात्मिक अनुभव रहा।
धार्मिक यात्राओं के लिए पहले भी बना चुके हैं पहचान
दिलेश्वर पटेल इससे पहले भी कई धार्मिक और सामाजिक जागरूकता यात्राएं कर चुके हैं।
उन्होंने रामपुर से अयोध्या धाम तक साइकिल यात्रा कर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन किए थे। इसके अलावा उन्होंने रामपुर से खाटू श्याम धाम तक पदयात्रा, रामपुर से दिल्ली तक साइकिल यात्रा और दिल्ली से वृंदावन तक पदयात्रा भी की है।
इन यात्राओं के माध्यम से वे युवाओं को धर्म, संस्कृति, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जागरूकता से जोड़ने का संदेश देने का प्रयास करते रहे हैं।
इस बार सक्ती जिले के राजापारा निवासी संगम यादव भी उनके साथ इस कठिन धार्मिक यात्रा में सहभागी बने।
युवाओं के लिए बनी प्रेरणा
दोनों शिवभक्तों का कहना है कि यह यात्रा केवल व्यक्तिगत धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं थी, बल्कि युवाओं को अपनी संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने का एक प्रयास भी थी।
दिलेश्वर पटेल ने कहा कि बाबा भोलेनाथ की कृपा से उन्होंने घर के कुएं का पवित्र जल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचने और जलाभिषेक करने का संकल्प लिया था। बाबा की कृपा से यह संकल्प पूरा हुआ और इसके बाद बासुकीनाथ धाम में भी जलाभिषेक करने का अवसर मिला।
वहीं, संगम यादव ने कहा कि इतनी लंबी पदयात्रा कठिन जरूर थी, लेकिन रास्ते में श्रद्धालुओं का सहयोग, लोगों का आशीर्वाद और भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था ने यात्रा को पूरा करने की शक्ति दी।
रामपुर और राजापारा में खुशी का माहौल
दोनों युवाओं की धार्मिक पदयात्रा सफल होने के बाद रामपुर और राजापारा में खुशी का माहौल है। ग्रामीणों, परिजनों और शुभचिंतकों ने दोनों को बाबा बैद्यनाथ और बासुकीनाथ धाम में जलाभिषेक का संकल्प पूरा करने पर बधाई दी।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि आज के दौर में युवाओं द्वारा इतनी लंबी दूरी की धार्मिक पदयात्रा करना और अपने घर के पवित्र जल को लेकर देवघर पहुंचकर भगवान शिव को अर्पित करना आस्था, अनुशासन, संस्कार और संकल्प का प्रेरणादायक उदाहरण है।
संगम यादव और दिलेश्वर पटेल की यह 630 किलोमीटर की धार्मिक पदयात्रा न केवल उनकी व्यक्तिगत श्रद्धा का प्रतीक बनी, बल्कि युवाओं को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ने का संदेश भी देती है।
