ऑनलाइन ठगी से लेकर क्रिप्टो अपराध तक की दी गई जानकारी, ‘स्वर्णिम समय’ में त्वरित कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्य जुटाने पर विशेष जोर

रायपुर, 8 सितंबर 2026। साइबर और डिजिटल माध्यमों से बढ़ते वित्तीय अपराधों की प्रभावी रोकथाम एवं विवेचना को मजबूत करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा रायपुर के विमतारा सभागार में “New Age Financial Crimes & Response Readiness” विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में प्रदेश के सभी जिलों से करीब 300 पुलिस अधिकारी एवं विवेचक शामिल हुए।
कार्यशाला में साइबर वित्तीय अपराधों के बदलते स्वरूप, अपराधियों द्वारा अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों और ऐसे मामलों में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया को लेकर अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
कार्यशाला में पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, महानिदेशक (प्रशिक्षण) श्री जी.पी. सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री दीपांशु काबरा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अमित कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ. आनंद छाबड़ा, पुलिस महानिरीक्षक श्री प्रशांत अग्रवाल, पुलिस उप महानिरीक्षक श्री सुजीत कुमार एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक पल्लव की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के दौरान साइबर अपराधों से जुड़े मामलों की विवेचना में आधुनिक तकनीकों और प्रभावी पुलिसिंग के महत्व पर चर्चा की गई।
ऑनलाइन निवेश से लेकर UPI फ्रॉड तक की जानकारी
कार्यशाला के विषय विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने पुलिस अधिकारियों को साइबर वित्तीय अपराधों के बदलते स्वरूप और आधुनिक विवेचना तकनीकों के बारे में प्रशिक्षण दिया।
इस दौरान ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, क्रिप्टोकरेंसी अपराध, म्यूल खाते, फर्जी पहचान एवं सत्यापन, UPI और इंटरनेट बैंकिंग धोखाधड़ी, QR कोड फ्रॉड तथा रिमोट डिवाइस कंट्रोल आधारित धोखाधड़ी जैसे साइबर अपराधों पर विस्तार से जानकारी दी गई।
अधिकारियों को यह भी बताया गया कि साइबर अपराधों की जांच के दौरान अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले डिजिटल माध्यमों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को किस तरह समझा और ट्रैक किया जा सकता है।
‘स्वर्णिम समय’ में कार्रवाई पर विशेष जोर
कार्यशाला में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में ‘स्वर्णिम समय’ के दौरान त्वरित कार्रवाई को सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक बताया गया।
अधिकारियों को समझाया गया कि साइबर ठगी की सूचना मिलते ही संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की पहचान, धनराशि को रोकने तथा संबंधित बैंक और वित्तीय संस्थाओं के साथ तत्काल समन्वय कैसे किया जाए।
समय पर कार्रवाई के जरिए ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और पीड़ित को राहत दिलाने की प्रक्रिया पर भी व्यावहारिक जानकारी दी गई।
डिजिटल साक्ष्यों से अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने की ट्रेनिंग
कार्यशाला की खास विशेषता व्यावहारिक विवेचना और वास्तविक प्रकरणों पर आधारित प्रशिक्षण रही। पुलिस अधिकारियों को डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण एवं विश्लेषण तथा डिजिटल पदचिह्नों की पहचान से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान पीड़ित से लेकर वित्तीय लेन-देन, म्यूल खाते और लाभार्थी तक की अलग-अलग कड़ियों को जोड़कर अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने की आधुनिक तकनीकों पर भी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की गई।
प्रश्नोत्तर और प्रकरण चर्चा के जरिए साझा किए अनुभव
कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रश्नोत्तर एवं प्रकरण चर्चा आयोजित की गई। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और विवेचकों ने साइबर अपराधों की जांच के दौरान सामने आने वाली चुनौतियों और अपने अनुभव साझा किए।
विशेषज्ञ ने अधिकारियों की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए उन्हें विवेचना से जुड़े आवश्यक सुझाव और मार्गदर्शन दिया।
साइबर अपराधों से निपटने की क्षमता होगी मजबूत
छत्तीसगढ़ पुलिस की यह कार्यशाला साइबर अपराधों की प्रभावी विवेचना, त्वरित प्रतिक्रिया और आधुनिक तकनीकों के उपयोग की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रही।
बढ़ते डिजिटल वित्तीय अपराधों के बीच पुलिस अधिकारियों को आधुनिक साइबर अपराधों की कार्यप्रणाली और वैज्ञानिक विवेचना तकनीकों से लगातार अपडेट करना ऐसे मामलों में कार्रवाई को और प्रभावी बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
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