समग्र शिक्षा और एक कदम और फाउंडेशन के संयुक्त प्रशिक्षण में 39 बच्चों ने सीखी डिजिटल तकनीक, अभिभावकों को भी दिया आत्मनिर्भरता का मंत्र

रायगढ़, 23 अगस्त 2026। आधुनिक तकनीक के दौर में दृष्टिबाधिता अब स्मार्टफोन और डिजिटल संसाधनों के उपयोग में बाधा नहीं बनेगी। दृष्टिबाधित बच्चों को तकनीक के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से समग्र शिक्षा एवं एक कदम और फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 20 से 22 अगस्त तक तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में जिले के 39 चिन्हांकित दृष्टिबाधित बच्चों और उनके अभिभावकों ने हिस्सा लिया। इस दौरान बच्चों को बिना देखे स्मार्टफोन संचालित करने और डिजिटल संसाधनों का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
तीन दिनों तक सीखी स्मार्टफोन चलाने की तकनीक
प्रशिक्षण के दौरान एक कदम और फाउंडेशन के मास्टर ट्रेनर्स और समग्र शिक्षा के बीआरपी स्पेशल एजुकेटर्स ने बच्चों को स्मार्टफोन के स्वतंत्र संचालन की जानकारी दी।
बच्चों को बिना देखे मोबाइल चलाना, विभिन्न उपयोगी सुविधाओं का इस्तेमाल और सहायक तकनीकों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षकों ने बताया कि स्मार्टफोन केवल बातचीत या मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि इसके जरिए शिक्षा, जानकारी, संवाद और व्यक्तिगत क्षमताओं के विकास में भी मदद ली जा सकती है।
तीन दिनों तक बच्चों ने स्वयं स्मार्टफोन चलाकर अलग-अलग गतिविधियों का अभ्यास किया। लगातार अभ्यास के दौरान बच्चों में तकनीक के प्रति आत्मविश्वास और रुचि बढ़ती दिखाई दी।
अभिभावकों को भी दिया गया आत्मनिर्भरता का मंत्र

प्रशिक्षण कार्यक्रम में बच्चों के साथ उनके अभिभावकों के लिए भी विशेष सत्र आयोजित किए गए। बीआरपी स्पेशल एजुकेटर्स और मास्टर ट्रेनर्स ने अभिभावकों को दृष्टिबाधित बच्चों की आवश्यकताओं को समझने और उनके साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया।
अभिभावकों को बताया गया कि बच्चों के प्रति केवल सहानुभूति रखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें अवसर, प्रोत्साहन और विश्वास देना अधिक जरूरी है।
बच्चों को छोटे-छोटे कार्य स्वयं करने और तकनीक का स्वतंत्र रूप से उपयोग करने का अवसर देने से उनमें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता विकसित होती है।
अतिथियों के सामने बच्चों ने चलाया स्मार्टफोन
प्रशिक्षण के अंतिम दिन बच्चों ने अधिकारियों और अतिथियों के सामने स्वयं स्मार्टफोन संचालित कर प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए कौशल का प्रदर्शन किया।
दृष्टिबाधित बच्चों ने बिना देखे मोबाइल चलाकर अपनी प्रतिभा और तकनीकी कौशल का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। बच्चों का आत्मविश्वास देखकर उपस्थित अधिकारियों, प्रशिक्षकों और अभिभावकों ने उनका उत्साहवर्धन किया।
यह प्रदर्शन इस बात का प्रेरणादायक उदाहरण रहा कि उचित प्रशिक्षण, तकनीक और अवसर मिलने पर दृष्टिबाधित बच्चे भी डिजिटल संसाधनों का प्रभावी उपयोग करते हुए आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
अधिकारियों ने बच्चों का बढ़ाया उत्साह
समापन अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू, जिला मिशन समन्वयक आलोक स्वर्णकार, समावेशी शिक्षा के जिला प्रभारी एपीसी भूपेंद्र पटेल, रायगढ़ बीआरसी मनोज अग्रवाल तथा एक कदम और फाउंडेशन के राज्य समन्वयक आशुतोष महंत उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने बच्चों से संवाद किया, उनके द्वारा सीखे गए स्मार्टफोन संचालन कौशल को देखा और उनके आत्मविश्वास की सराहना की।
विभिन्न विकासखंडों के अमले ने दिया सहयोग
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए बीआरपी स्पेशल एजुकेटर्स और हेल्पर्स का विशेष सहयोग रहा।
विकासखंड रायगढ़ से सीएसी विकास पटेल, राजकमल पटेल एवं रविंद्र पटेल, प्रधान पाठक खगेश्वर साहू, सहायक शिक्षक सौरभ पटेल तथा प्रदीप कुमार साहनी ने आयोजन और व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तीन दिवसीय इस प्रशिक्षण ने दृष्टिबाधित बच्चों के लिए तकनीक के माध्यम से संभावनाओं के नए द्वार खोले। अंतिम दिन बच्चों द्वारा स्वयं स्मार्टफोन संचालित कर अपनी प्रतिभा दिखाना प्रशिक्षण की सबसे बड़ी उपलब्धि रही।
🔴 5 बड़ी Highlights
🔴 1. रायगढ़ में 39 दृष्टिबाधित बच्चों को बिना देखे स्मार्टफोन चलाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
🔴 2. समग्र शिक्षा और एक कदम और फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में 20 से 22 अगस्त तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित हुआ।
🔴 3. बच्चों ने स्मार्टफोन के जरिए शिक्षा, संवाद, जानकारी और दैनिक जरूरतों के लिए डिजिटल संसाधनों का उपयोग करना सीखा।
🔴 4. अभिभावकों को बच्चों को सहानुभूति के साथ-साथ अवसर, प्रोत्साहन और आत्मनिर्भर बनने का भरोसा देने की सीख दी गई।
🔴 5. प्रशिक्षण के अंतिम दिन दृष्टिबाधित बच्चों ने अधिकारियों और अतिथियों के सामने बिना देखे स्वयं स्मार्टफोन चलाकर अपनी प्रतिभा दिखाई।
