रायपुर। छत्तीसगढ़ में बाल श्रम के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 16 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के त्वरित हस्तक्षेप के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन और स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) की संयुक्त टीम ने महज डेढ़ घंटे के भीतर कार्रवाई करते हुए बच्चों को बस से सुरक्षित बरामद किया। मामले में एक नियोक्ता को गिरफ्तार किया गया है, जबकि पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।
🔴 Highlight Points
- ▶️ छत्तीसगढ़ में 16 बच्चों को बाल श्रम से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया।
- ▶️ चाइल्ड हेल्पलाइन और SJPU की संयुक्त टीम ने की कार्रवाई।
- ▶️ महज डेढ़ घंटे में बस रोककर बच्चों को बचाया गया।
- ▶️ 7 नाबालिग बच्चे 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के मिले।
- ▶️ मशरूम फैक्ट्री में काम कराने के आरोप में एक नियोक्ता गिरफ्तार।
- ▶️ पूरे नेटवर्क की जांच जारी।
- ▶️ बाल श्रम की सूचना मिलने पर 1098 पर कॉल करने की अपील।

सूचना मिलते ही शुरू हुई कार्रवाई
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा को 5 अगस्त की शाम एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन की ओर से सूचना मिली थी कि रायपुर से कुछ बच्चों को बस के जरिए बाल श्रम के लिए ले जाया जा रहा है।
सूचना मिलते ही आयोग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) और चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क किया। संयुक्त टीम ने अभियान चलाकर करीब डेढ़ घंटे के भीतर बस को रोककर सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
बस में मिले 16 बच्चे
रेस्क्यू के दौरान बस में कुल 16 बच्चे मिले। इनमें 7 बच्चे 14 से 16 वर्ष आयु वर्ग के नाबालिग हैं। सभी बच्चे बैगा जनजाति से संबंधित बताए जा रहे हैं और राजनांदगांव तथा कबीरधाम जिले के निवासी हैं।
रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित बाल आश्रय गृह में रखा गया है, जहां उनकी काउंसलिंग और देखभाल की जा रही है।
मशरूम फैक्ट्री में काम कराने का आरोप
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चों को कचन्दूर स्थित मॉडर्न एग्रो मशरूम में काम कराने के उद्देश्य से ले जाया जा रहा था।
मामले में नियोक्ता लक्ष्मण पटेल को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 143(2), 143(3), 143(5) और 111(1) के तहत कार्रवाई की जा रही है।

आयोग की सख्त चेतावनी
छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाल श्रम, बाल तस्करी और बच्चों के शोषण से जुड़े मामलों में आयोग जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई करता है।
उन्होंने कहा कि पूरे मामले में जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

1098 पर दें सूचना
आयोग ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल श्रम या बाल तस्करी से जुड़ी कोई जानकारी मिले, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 या संबंधित विभाग को सूचना दें, ताकि समय रहते बच्चों को सुरक्षित बचाया जा सके।
