आदिवासी संस्कृति, मातृभाषा और परंपराओं के संरक्षण का दिया संदेश
रायगढ़, प्रयास आवासीय विद्यालय में विश्व आदिवासी दिवस उत्साह और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में रायगढ़ की सेवानिवृत्त उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) श्रीमती साधना सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने अपनी मातृभाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जुड़े विचार साझा किए। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के माध्यम से आदिवासी समाज की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया।

आदिवासी संस्कृति और परंपराएं भारत की अमूल्य धरोहर
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती साधना सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, भाषा, परंपराएं और जीवनशैली भारत की अमूल्य धरोहर हैं। आदिवासी समुदाय ने सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीने की परंपरा को संरक्षित रखा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लिए जंगल केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन का आधार है। इसी तरह नदी उनकी संस्कृति का हिस्सा है और धरती को मां के समान पूजनीय माना जाता है।

आदिवासी आंदोलनों और वीरों को किया याद
श्रीमती साधना सिंह ने वर्ष 1859 में बस्तर के नांगुल दोरला के नेतृत्व में हुए “कोई विद्रोह” का उल्लेख करते हुए बताया कि आदिवासी समाज ने साल वृक्षों की कटाई का साहसपूर्वक विरोध किया था।
उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक आंदोलन जल, जंगल और जमीन के प्रति आदिवासी समाज के गहरे जुड़ाव और प्रकृति संरक्षण की भावना का प्रेरक उदाहरण है।
इस दौरान उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, वीर नारायण सिंह, सिद्धू-कान्हू, तिलका मांझी और रानी दुर्गावती जैसे महान आदिवासी वीरों के योगदान को भी याद किया। उन्होंने कहा कि इन वीरों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों से इन महान व्यक्तित्वों के संघर्ष, साहस और त्याग से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
अपनी मातृभाषा में विद्यार्थियों ने साझा किए विचार
कार्यक्रम के दौरान श्रीमती साधना सिंह ने आदिवासी अंचल से निकलकर कठिन परिस्थितियों और विभिन्न चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य तक पहुंचने की प्रेरक जीवन-यात्रा विद्यार्थियों के साथ साझा की।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, दृढ़ संकल्प, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने शिक्षा को जीवन की सबसे बड़ी शक्ति बनाकर आगे बढ़ने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया।
मुख्य अतिथि के प्रेरणादायी उद्बोधन से प्रभावित होकर कई विद्यार्थी मंच पर आए और अपनी-अपनी मातृभाषा में आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों पर विचार व्यक्त किए।
विद्यार्थियों की सहज, प्रभावशाली और आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष और यादगार बना दिया। विद्यार्थियों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व व्यक्त करते हुए नई पीढ़ी को अपनी भाषा और परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश दिया।
प्रकृति और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का लिया संकल्प
विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत के प्रति सम्मान के साथ-साथ समानता, संवेदनशीलता, प्रकृति प्रेम और सभी संस्कृतियों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना रहा।
कार्यक्रम में जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण की रक्षा के लिए जागरूक रहने तथा अपनी सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि “आदिवासी संस्कृति का सम्मान, प्रकृति और मानवता का सम्मान है।”
विद्यालय के अधिकारी और शिक्षक रहे उपस्थित
कार्यक्रम में प्रशासकीय अधिकारी श्री के. एन. तिवारी, छात्रावास अधीक्षक श्री एकेश्वर गनातिया, छात्रावास अधीक्षिका श्रीमती भावना पटेल सहित विद्यालय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे।
विद्यालय परिवार ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अपनी संस्कृति, मातृभाषा और परंपराओं पर गर्व करने तथा इन्हें आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।
🔴 मुख्य बातें एक नजर में
- प्रयास आवासीय विद्यालय में विश्व आदिवासी दिवस मनाया गया।
- सेवानिवृत्त डीएसपी साधना सिंह रहीं मुख्य अतिथि।
- विद्यार्थियों ने अपनी मातृभाषा में विचार साझा किए।
- आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं के संरक्षण पर जोर दिया गया।
- भगवान बिरसा मुंडा समेत महान आदिवासी वीरों को किया गया याद।
- विद्यार्थियों को शिक्षा, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
- जल, जंगल, जमीन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
- सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का लिया गया संकल्प।
