24 सेंटीमीटर से अधिक आकार का ट्यूमर फुटबॉल जितना बड़ा था, आंतों और मूत्रवाहिनी से चिपके होने के कारण बेहद जटिल थी सर्जरी, तीन विभागों की संयुक्त टीम ने बचाई महिला की जान

श्री लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति चिकित्सालय, रायगढ़ के चिकित्सकों ने एक बेहद जटिल और हाई रिस्क सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। डॉक्टरों की टीम ने 46 वर्षीय महिला के पेट से करीब 8 किलोग्राम वजनी और फुटबॉल के आकार का विशाल ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालकर उसे नई जिंदगी दी है।
झलमला निवासी चंपा यादव पिछले करीब एक महीने से पेट में तेज दर्द, अत्यधिक सूजन और उल्टी की समस्या से परेशान थीं। 22 अगस्त 2026 को गंभीर हालत में उन्हें प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया। उस समय उनका ब्लड प्रेशर गिरकर 84/54 mmHg तक पहुंच गया था, जबकि हीमोग्लोबिन का स्तर केवल 7.5 g/dL था।
सीटी स्कैन में सामने आई गंभीर स्थिति
मरीज की रेडियोलॉजिकल जांच, जिसमें सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड शामिल था, में पेट के भीतर एक बेहद बड़ा ट्यूमर पाया गया। इसका आकार लगभग 24.2 × 23.1 × 17 सेंटीमीटर और वजन करीब 8 किलोग्राम था।
विशाल ट्यूमर के दबाव के कारण महिला का गर्भाशय विस्थापित हो गया था। इसके साथ ही बायीं मूत्रवाहिनी (Ureter) पर भी दबाव पड़ रहा था, जिससे किडनी प्रभावित हो रही थी। जांच में लिवर के पैरामीटर्स में भी गड़बड़ी सामने आई।
पहले मरीज को किया गया स्थिर
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन करने के बजाय पहले उनकी हालत को स्थिर किया। शरीर में खून की भारी कमी को दूर करने के लिए उन्हें कई यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल (PRBC) चढ़ाए गए। इसके साथ ही एंटीबायोटिक्स और अन्य जरूरी उपचार देकर उनके ऑर्गन फंक्शन को सर्जरी के लिए अनुकूल बनाया गया।
मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद 1 सितंबर 2026 को जनरल एनेस्थीसिया के तहत हाई रिस्क एक्सप्लोरेटरी लैपरोटॉमी सर्जरी की गई।
आंतों से गहराई तक चिपका था ट्यूमर
सर्जरी के दौरान डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि विशाल ट्यूमर आंतों से बेहद गहराई तक चिपका हुआ था। स्थिति की जटिलता को देखते हुए ऑपरेशन के दौरान जनरल सर्जरी विभाग की टीम की विशेष सहायता ली गई।
प्रसूति एवं स्त्री रोग, जनरल सर्जरी और निश्चेतना विभाग की संयुक्त टीम ने बेहद सावधानी और सर्जिकल कौशल के साथ आंतों से ट्यूमर के जटिल जुड़ाव को अलग किया। साथ ही दोनों मूत्रवाहिनियों को सुरक्षित रखते हुए बिना किसी नुकसान के अलग किया गया।
इसके बाद गर्भाशय सहित विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक शरीर से बाहर निकाल लिया गया।
ऑपरेशन के बाद महिला की हालत स्थिर
कई चुनौतियों के बावजूद यह जटिल ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। सर्जरी के बाद चंपा यादव को रिकवरी रूम में शिफ्ट किया गया, जहां उन्हें आईवी फ्लूइड्स और दर्द निवारक दवाएं दी जा रही हैं। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बताई गई है और वे स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं।
डॉक्टरों की टीम ने पेश किया बेहतरीन टीमवर्क
अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार और अस्पताल अधीक्षक डॉ. दुर्गाशंकर पटेल के मार्गदर्शन में यह जटिल सर्जरी संपन्न हुई।
सर्जिकल टीम में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. राघवेन्द्र महिलांगे, डॉ. कुंती चौधरी, डॉ. अनीस भगत, निश्चेतना विभागाध्यक्ष डॉ. अशोक सिंह सिदार और सर्जरी विभाग के डॉ. निखिलेश शिंदे सहित नर्सिंग एवं पैरामेडिकल स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
डॉक्टरों की सूझबूझ, आपसी समन्वय, बेहतरीन टीमवर्क और त्वरित कार्यवाही से यह हाई रिस्क सर्जरी सफल हो सकी। मेडिकल कॉलेज की टीम ने जटिल परिस्थितियों में महिला की जान बचाकर चिकित्सा सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है
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